होश दिवस

सदियों से बुद्धों का एकमात्र सन्देश रहा है: “होश में जियो ।” जो होश में है वही जीवन को महसूस कर पाता है, वही जीवन की धड़कन सुन पाता है, वही जीवन की तरंगे महसूस कर पाता है । जो बेहोश है उसके लिए सब कुछ मृत है । सब कुछ होते हुए भी कुछ भी नहीं है । जिसकी आँखें ही बंद हों उसके लिए इन्द्रधनुष का होना या न होना एक ही बात है ।

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