संवेदना दिवस

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हम जितना स्वयं के समीप आते हैं उतना ही हम संवेदनशील होते जाते हैं और जितना हम संवेदनशील होते जाते हैं उतना स्वयं के समीप आते हैं । संवेदनशीलता सूचक है इस बात का कि हमारी यात्रा स्थूल से सूक्ष्म की ओर हो रही है । जितना सूक्ष्म गहराता है उतना जीवन के रहस्यों से पर्दा उठने लगता है । फिर हर एक चीज़ अद्भुत लगने लगती है ।
            अस्तित्व का कण-कण परम सौंदर्य से लबरेज़ है । संवेदनशील बनिए, और यह सब आपका है ।

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