गहरी नींद कैसे पाएं ?

नींद थकान मिटाने की सर्वोत्तम विधि है । नींद औषधि भी है । और एक रहस्य भी । जब आप नींद में होते हैं, तो विश्राम में होते हैं, शरीर शांत होता है, अंग-प्रत्यंग स्थिर होते हैं । इसीलिए एक अच्छी गहरी नींद के बाद आप ऊर्जान्वित महसूस करते हैं, एकदम तरोताज़ा ! तो नींद आपको रिचार्ज कर देती है, पुनरावेशित । नींद जितनी गहरी होती है, मन उतना शांत होता है । और एक शांत मन बहुत सारी बीमारियों जैसे कि ब्लड-प्रेशर, हाईपरटेंशन, इत्यादि से हमें बचाता है । ये सारी बीमारियाँ इसीलिए होती हैं क्योंकि हमारा मन पूरे वक़्त उथल-पुथल करता रहता है, पूरे वक़्त हलचल होती रहती है अंदर । यह हलचल तनाव और चिंता पैदा करती है जिससे बीमारियाँ होती हैं । यदि हम एक गहरी नींद ले पाते हैं, तो तनाव से कुछ देर मुक्ति मिल जाती है; जिसका लाभ शरीर को होता है । तो नींद हमारे लिए एक औषधि का काम भी करती है । और नींद एक रहस्य भी है–एक आध्यात्मिक रहस्य । नींद में कुछ देर के लिए व्यक्ति ग़ायब हो जाता है । जैसे हो ही न । एक दूसरे जगत में पहुँच जाता है । इस जगत से उसका नाता-रिश्ता टूट जाता है और किसी दूसरे जगत से रिश्ता जुड़ जाता है । इसीलिए नींद, ध्यान, और मृत्यु गहरे में जुड़े हुए हैं एक दूसरे से ।
            अतः, नींद हमारे शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक विकास के लिए बहुत ही ज़रूरी है । लेकिन एक गहरी नींद ही इस विकास में सक्षम है, क्योंकि जो नींद उथली होती है वह हमें न ऊर्जा दे पाती है न हमें तरोताज़ा कर पाती है । फिर आध्यात्मिक रहस्य तो बहुत दूर की बात है । थोड़ा ग़ौर करके देखें कि आपके जीवन में जो बहुत सारी परेशानियाँ हैं उसका एक मूल कारण आपका ठीक से न सोना है । ज़्यादातर लोगों की नींद बहुत उथली होती है । इसीलिए जब वे उठते हैं तब थके-थके से महसूस करते हैं, जैसे सोए ही न हों । सिर दर्द होता है, पूरा शरीर मानो अकड़ा हुआ हो, बोझिल सा ।
            सपनों से भरी हुई नींद उथली होती है । जितने अधिक सपने, उतना अधिक उथलापन । और जितने कम सपने, उतनी गहरी नींद । दरअसल, ध्यान एक स्वप्नरहित नींद है । इसे ही योग निद्रा भी कहते हैं । कृष्ण ने गीता में कहा है कि योगी सोते वक़्त भी जागता है । इसका अर्थ यह है कि वह सोते वक़्त भी होश में होता है । तो नींद जब भी सपनों से भरी होती है अपूर्ण होती है । एक स्वप्नरहित नींद की चाहत हर किसी को होती है । गहरे में यह लालसा सभी में होती है । कारण हर कोई नहीं जानता । कारण यही है कि एक गहरी नींद कुंजी है संपूर्ण स्वास्थ्य की । तो आइए हम जानते हैं कि गहरी नींद कैसे पाएं ।
            गहरी नींद को पाने की विधि के चार चरण हैं । पहला : सोने का स्थान साफ़-सुथरा होना चाहिए । दूसरा : सोने का समय निश्चित होना चाहिए । तीसरा : सोते वक़्त शरीर की मुद्रा विश्रामपूर्ण होनी चाहिए । चौथा : सोते वक़्त साँसों पर अवधान यानी अटेंशन होना चाहिए । आइए इन चारों चरणों को एक-एक करके समझते हैं ।
            पहला : गंदी चीज़ें नकारात्मक संवेग पैदा करती हैं, एक बीमारी-भरा वातावरण पैदा करती हैं । इस वातावरण का हमारी नींद पर दुष्प्रभाव पड़ता है । इसीलिए सोने का स्थान साफ़-सुथरा होना चाहिए । आपका बिस्तर, गद्दा, चादर, तकिया साफ़-सुथरे होने चाहिए । साथ ही, सोने के पहले अच्छी तरह से हाथ-मुँह धोकर, धूल, मिट्टी, पसीना शरीर से साफ़ करके सोना चाहिए ।
            दूसरा : क्या आप निश्चित समय पर सोते हैं या फिर नींद का समय कुछ भी रखा हुआ है, जब मर्ज़ी है तब सो गए ? यदि आप ऐसा करते हैं तो आप शरीर के दुश्मन हैं । शरीर को अनुशासित करना होता है । लेकिन अक्सर हमें अनुशासन का अर्थ प्रतिबन्ध लगता है । वी. के. एस. आयंगर, जगत-विख्यात योग शिक्षक, कहते हैं कि, “अनुशासन का मतलब हमें लगता है बंधन और लापरवाही का मतलब हमारे लिए होता है स्वतंत्रता ।” जब कभी हमें अनुशासित किया जाता है तो हमें लगता है कि यह हमारी स्वतंत्रता का उल्लंघन है । ऐसा नहीं है । यदि आप शरीर को अनुशासित नहीं करेंगे तो बीमारियाँ होना बिल्कुल अपरिहार्य है । इसीलिए, सोने का समय निर्धारित करें । योग एक प्रकार का अनुशासन ही है । योग है शरीर को अनुशासित करना और उसके बाद अपनी जीवन-शैली को अनुशासित करना । इस अनुशासन का एक बहुत गंभीर और ज़रूरी हिस्सा है नींद का निश्चित समय । तो समय पर सोयें, समय पर उठें । अपनी सुविधा के अनुसार समय निश्चित करें । अच्छा तो यही होता है कि रात को 10:00-11:00 बजे के आसपास सो जाएं और सुबह 4:30-5:00 बजे उठ जाएं । यह सोने के लिए बहुत ही आदर्श समय माना जाता है । बाक़ी फिर पारिवारिक विवशताएँ होती हैं, व्यवसायिक विवशताएँ होती हैं, कई लोगों को नाईट ड्यूटी करनी होती है । तो उस हिसाब से समय निर्धारित करें । लेकिन भरपूर प्रयास करें कि आपका समय 10:00-5:00 के आसपास हो । दूसरी बात : अति निद्रा और अल्प निद्रा दोनों से बचना है । ज़्यादातर लोगों के पास जितना भी समय होता है–अतिरिक्त समय काम के अलावा–वे सोने में बिताना ज़्यादा पसंद करते हैं । यह अति निद्रा एक प्रकार की बेहोशी पैदा करने लगती है । और अल्प निद्रा शरीर के लिए बहुत ही नुक़सानदायक होती है । अति निद्रा और अल्प निद्रा दोनों ही डिप्रेशन यानी विषाद के लक्षण माने जाते हैं । तो यह भी देखना होगा कि यदि आप अति में सोते हैं तो कहीं आप विषाद के रोगी तो नहीं बनते जा रहे । और अल्प निद्रा का कारण आपकी व्यस्तता भी हो सकती है । लेकिन समय तो निकालना ही होगा । नहीं तो, फिर परिणाम भी भुगतने होंगे । अतः, आपको नींद का समय और मात्रा दोनों ही निर्धारित करने होंगे ।
            तीसरा : सोने के लिए सबसे अच्छी मुद्रा/आसन शवासन होता है । शवासन करने के लिए लेट जायें पीठ के बल । दोनों पैरों को थोड़ा दूरी पर रखें एक दूसरे से । दोनों हाथ कमर के समानांतर, ऊपर की ओर खुले हुए । पूरे शरीर को ऐसे छोड़ देना है जैसे शरीर मृत है, शरीर में जान ही नहीं है । बेजान होकर सो जाना है । ज़्यादातर लोग सोते वक़्त इतनी बार करवट बदलते हैं, इससे नींद में विघ्न पड़ता है । पर, आप जितना एक मुद्रा में अपने शरीर को साध कर सोते हैं उतनी गहरी नींद आती है । तो शवासन का थोड़ा सा अभ्यास करें सोते वक़्त । क्योंकि मन चंचल है तो हमेशा आपको वह कहेगा कि थोड़ा इस करवट हो जाएं, थोड़ा उस करवट हो जाएं, थोड़ा ऐसे लेट जाएं, थोड़ा वैसे लेट जाएं । मन की न सुनें । शरीर को स्थिर रखें । इससे गहरी नींद पाने में बहुत मदद मिलती है ।
            चौथा : सोते समय विपश्यना का अभ्यास करें । विपश्यना ध्यान की एक विधि है । इसमें हम साँस पर ध्यान केंद्रित करते हैं : साँस अंदर जा रही है, साँस बाहर आ रही है, बस इसे देखना होता है इसके साक्षी बनकर । जितना विश्राम में आप लेटे होंगे आप देखेंगे कि आपकी साँस उतनी गहरी होती जाती है । और साँस जितनी गहरी होगी, नींद भी उतनी ही गहरी होगी । तो इसे ध्यान से समझें कि शरीर को विश्राम की अवस्था में रखना है, ढीला छोड़ देना है, बिल्कुल बेजान । इसके पश्चात साँसों पर ध्यान केंद्रित करना–अंदर आती साँस, बाहर जाती साँस । देखते रहें इसे । और यह भी अवलोकन करते रहें कि जितना आप विश्राम में जा रहे हैं, शरीर जितना शांत होता जा रहा है, साँस उतनी गहराती जा रही है । और जितनी साँस गहराती जा रही है, उतना शरीर विश्राम में आता जा रहा है । ये दोनों चीज़ें एक दूसरे पर प्रभाव डालती हैं । शरीर को विश्राम की अवस्था में लाने में सहयोग देती हैं । और जब शरीर विश्राम में होता है तब मन भी शांत होता है । दूसरी बात है : जब आप साँसों पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो मन अपने आप शांत होने लगता है, विचार छँटने लगते हैं । क्योंकि उन विचारों को कोई तवज्जो नहीं मिलती, कोई ध्यान नहीं देता उन पर, तो वे स्वयं ही शांत होने लगते हैं । धीरे-धीरे मन की भीड़ कम होने लगती है, ट्रैफिक शांत होने लगता है । अंततः, आपका मन पूर्ण शांत हो जाता है ।
            जब आप इस शांत, विचारशून्य स्थिति में नींद में प्रवेश करते हैं तब ऐसी गहरी नींद आती है जिसका स्वाद दुर्भाग्यवश बहुत कम लोगों ने चखा है । वह नींद इतनी गहरी है कि जब आप उसके बाद उठते हैं, तब आप भरे हुए होते हैं ऊर्जा से, अंग-प्रत्यंग से उर्जा प्रस्फुटित हो रही होती है । साथ ही, पहली बार इस गहरी नींद से आपको उस आनंद का पता भी चलता है जो ध्यान में आनंद होता है । इसी निद्रा को योग निद्रा भी कहते हैं । एक क्षण ऐसा भी आता है जब नींद इतनी गहरी होती है और आप साँसों पर ध्यान केंद्रित किए हुए होते हैं और अचानक आप पाते हैं कि आपका शरीर सो गया है और फिर भी आप अपनी साँसों को देख रहे हैं । यह बड़ा अद्भुत अनुभव होता है ! शरीर से अलग हो जाते हैं कुछ देर के लिए आप । शरीर के साक्षी बन जाते हैं और देख रहे होते हैं अपने शरीर को सोता हुआ । तो गहरी नींद आपको ध्यान का स्वाद चखाती है ।
            और जब आप अपने शरीर के दृष्टा होते हैं तभी मृत्यु की झलक भी पा लेते हैं । योग निद्रा में आप यह जानते हैं कि शरीर और आप अलग-अलग हैं, आप शरीर नहीं हैं । तो एक गहरी नींद आपको जीवन के गहनतम रहस्य, यानि मृत्यु से परिचित करा सकती है । न केवल परिचित करा सकती है बल्कि उससे मुक्त भी कर सकती है ।
            इस प्रकार, गहरी नींद हमारे शरीरिक, मानसिक, एवं आध्यात्मिक विकास के लिए नितांत आवश्यक है । इस दैनिक जीवन की क्रिया को यदि आप ऊपर बताई हुई विधि से कर पाएं तो आप गहन लाभ प्राप्त करेंगे । स्पष्ट है, इस विधि को करने के लिए अलग से समय निकालने की आवश्यकता नहीं ।

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