जान है तो जहान है

कहते हैं जान है तो जहान है यानि जो व्यक्ति स्वस्थ है, तंदुरुस्त है उसी के लिए संसार है | जो बीमार है उसके लिए संसार है ही नहीं | मतलब, संसार होते हुए भी उसे ऐसा लगता है जैसे उसके ख़ुद के अस्तित्व का कोई मोल ही नहीं है, कोई अर्थ ही नहीं है | और जिसके ख़ुद के अस्तित्व का कोई मोल न हो उसके लिए संसार का भी मोल कुछ नहीं होता |
हममें से कितने लोग तंदुरुस्ती का आनंद, joy of health, जानते हैं ? बहुत कम | ज़्यादातर लोग बचपन से ही बीमार रहे हैं | पर यह स्थिति इतनी नियमित रही है कि उन्हें बीमारी और तंदुरुस्ती में कोई ज़्यादा अंतर नहीं दिखता |
यह अंतर मुझे तब दिखना शुरू हुआ जब मैंने योग करना शुरू किया | योग से एक ऐसा आनंद अन्दर उमड़ने लगा मानो पूरा शरीर एक संगीत हो | मैं आश्चर्यचकित था कि शरीर जैसी एक आम सी चीज़ जिस पर हम कभी ध्यान भी नहीं देते अच्छे से वह भी एक संगीत पैदा कर सकता है | धीरे-धीरे मुझे यह बात समझ आयी कि तंदुरुस्ती एक अलग ही आयाम है |
इसको दुर्भाग्यवश ज़्यादातर लोगों ने कभी जाना ही नहीं | मुझे एक घटना याद आती है: एक बार की बात है मेरे एक मित्र की बड़ी बहन को कोई बीमारी हुई | डॉक्टर ने कहा कि, “यदि आप 2 साल और जीना चाहते हैं तो आपको कुछ चीज़ों से परहेज करना होगा, कुछ चीज़ें खानी बंद करनी होगी | यदि आप ये सब खाते रहेंगे तो एक साल में ही मर जाएंगे |” उन्होंने यह सोचा कि जो चीज़ें खाने के लिए मना की जा रही हैं वे तो उनकी पसंदीदा हैं | अब बिना उनके जीना ऐसा ही है जैसे मरना | तो 2 साल ऐसे जीने से बेहतर है कि 1 साल खा-पीकर मरो | मुझे बात बड़ी जंची | आगे चलकर मुझे बहुत सारे ऐसे लोग मिले जो इसी प्रकार की सोच रखते थे | मेरी सोच तब बदली जब पहली बार मैंने योग के माध्यम से स्वास्थ का मज़ा चखा | यदि हम सही मायनो में एक स्वस्थ जीवन जीते हैं तो एक दिन ऐसा लगता है जैसे महीनों जी लिए | सुबह से लेकर रात तक हम इतनी प्रफुल्लता, इतने आनंद, इतनी ताज़गी में जीते हैं कि लगता है पहली बार ज़िन्दा हैं |
इसके विपरीत अधिकतर लोग हर समय एक बोझ सा महसूस करते हैं अपने शरीर और मन पर | इसीलिए वे बेहोशी में जीने लगते हैं | स्पष्ट है, यदि आपके लिए आपका शरीर बोझ है तो आप क्या करेंगे ? उसे बार-बार भुलाने की कोशिश करेंगे, है न? लेकिन आपका शरीर आपके लिए संगीत बन जाए तो आप उसके प्रति ज़्यादा से ज़्यादा जागरूक होंगे, उसे जीयेंगे, उसकी मस्ती में डूबेंगे | चूँकि आपका शरीर माध्यम होगा इस मस्ती का इसीलिए आप उसकी सुधि भी लेंगे | तब, बोझिल, बेरंग दुनिया बड़ी रंगीन, बड़ी ख़ुशनुमा लगेगी |
इसीलिए, ये कुतर्क छोड़ें कि मरना है तो खाओ, पीयो, ऐश करो | अपने शरीर का आनंद उठाएं | अच्छा खाना, नियमित योग, उचित नींद से अपनी पूरी क्षमता जगाएं | फिर जाने जीने का आनंद |

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